जयकारों के बीच मां दुर्गा की विदाई, भागलपुर में उमड़ा आस्था का सैलाब; निकली भव्य विसर्जन शोभायात्रा
भागलपुर। नम आंखें, हाथों में श्रद्धा और जुबां पर मां दुर्गा के जयकारे… रेशमी नगरी भागलपुर में मां दुर्गा की विदाई का भावुक नजारा देखने को मिला। ढोल-नगाड़ों की गूंज, भक्तिमय माहौल और श्रद्धालुओं की भारी भीड़ के बीच मां दुर्गा की प्रतिमाओं की भव्य विसर्जन शोभायात्रा निकाली गई। भक्तों ने नम आंखों से मां को विदाई दी और अगले बरस फिर आने की कामना की। सुबह से शुरू हुआ प्रतिमा विसर्जन का सिलसिला देर रात तक जारी रहा।
स्टेशन चौक से निकली मुख्य विसर्जन शोभायात्रा
दुर्गा पूजा महासमिति की मुख्य विसर्जन शोभायात्रा दोपहर तीन बजे स्टेशन चौक से शुरू हुई। शोभायात्रा में सबसे पहले परबत्ती पूजा समिति की प्रतिमा शामिल हुई। इसके बाद यात्रा वेराइटी चौक, खलीफाबाग चौक, कोतवाली चौक, नया बाजार, बूढ़ानाथ चौक, आदमपुर और खंजरपुर होते हुए मायागंज अस्पताल के पीछे स्थित मुशहरी घाट की ओर बढ़ी।
दुर्गा पूजा महासमिति के अध्यक्ष अभय घोष सोनू और महासचिव जयनंदन आचार्य के अनुसार, गुरुवार को कुल 45 प्रतिमाओं का विसर्जन होना था। इनमें 30 प्रमुख पूजा स्थलों की प्रतिमाएं मुख्य शोभायात्रा में शामिल रहीं। विसर्जन मार्ग पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी। स्टेशन चौक से खंजरपुर तक मां के जयकारे गूंजते रहे और भक्तों का उत्साह देखते ही बन रहा था।
भक्ति के साथ मेले की रौनक, सड़कों पर उमड़ी भीड़
विसर्जन शोभायात्रा के दौरान भक्ति के साथ मेले की रौनक भी देखने को मिली। सड़क किनारे सजी चाट-पकौड़े और खिलौनों की दुकानों पर लोगों की चहल-पहल बनी रही। बच्चे मेले का आनंद लेते नजर आए, वहीं बड़े श्रद्धालु मां दुर्गा की अंतिम झलक पाने के लिए सड़कों के किनारे खड़े रहे। ढोल-नगाड़ों की थाप और जय माता दी के उद्घोष से पूरा वातावरण भक्तिमय बना रहा।
बंगाली परंपरा के अनुसार बुधवार को हुआ था विसर्जन
बंगाली परंपरा के अनुसार, दुर्गाबाड़ी, कालीबाड़ी और बरारी रिफ्यूजी कॉलोनी समेत कुछ स्थानों की प्रतिमाओं का विसर्जन विजयादशमी के दिन बुधवार को ही कर दिया गया था। वहीं, गुरुवार को मुख्य विसर्जन शोभायात्रा में शामिल प्रतिमाओं के साथ श्रद्धालुओं ने मां दुर्गा को भावभीनी विदाई दी।
मां दुर्गा की विदाई के साथ ही नौ दिनों तक चले भक्ति और उत्साह के पर्व का समापन हुआ। भक्तों की आंखें नम थीं, लेकिन दिल में अगले साल मां के फिर आगमन की उम्मीद और विश्वास था। हर तरफ एक ही आवाज गूंज रही थी— “जय माता दी, अगले बरस तू जल्दी आना!”
Post by – AAMIR KHAN










