सिंदूर खेला, नम आंखें और मां से फिर आने का वादा… भागलपुर में दुर्गा विसर्जन का भावुक नजारा

बंगाली परंपरा के अनुसार मां दुर्गा को दी गई विदाई, दुर्गाबाड़ी और कालीबाड़ी से लेकर नाथनगर तक विसर्जन के दौरान उमड़े श्रद्धालु

भागलपुर। आस्था, उल्लास और भक्ति के बीच दुर्गा पूजा महोत्सव का समापन मां दुर्गा की विदाई के साथ हुआ। विजयादशमी के अवसर पर रेशमी नगरी भागलपुर में मां दुर्गा की प्रतिमाओं का विसर्जन पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ किया गया। कहीं मां के जयकारों से गलियां गूंज उठीं, तो कहीं बंगाली समाज की महिलाओं ने पारंपरिक सिंदूर खेला की रस्म निभाकर मां को अगले वर्ष फिर आने का निमंत्रण दिया। विदाई के इन भावुक पलों में श्रद्धालुओं की आंखें नम हो गईं।

दुर्गाबाड़ी और कालीबाड़ी में बंगाली परंपरा से विसर्जन

भागलपुर के दुर्गाबाड़ी और कालीबाड़ी में मां दुर्गा की प्रतिमाओं का विसर्जन बंगाली रीति-रिवाजों और विधि-विधान के साथ दीपनगर घाट पर संपन्न हुआ। इस दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे। मां दुर्गा के जयकारों के बीच भक्तों ने नम आंखों से मां को विदाई दी और अगले वर्ष फिर आगमन की कामना की।

वहीं, नाथनगर क्षेत्र में भी मां दुर्गा की विदाई पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ की गई। महाशय ड्योढ़ी की प्रतिमा का विसर्जन बंगाली टोला घाट पर, जबकि सुजानपुर दुर्गा मंदिर की प्रतिमा का विसर्जन चंपा नदी घाट पर संपन्न हुआ।

मखदूम शाह दरगाह घाट पर भी उमड़ी भीड़

गोपीनाथ घोष लेन, लखीकांत आचार्य लेन और चमरू साह लेन की मां दुर्गा की प्रतिमाओं का विसर्जन मखदूम शाह दरगाह घाट पर किया गया। विसर्जन के दौरान घाटों पर श्रद्धालुओं की भीड़ जुटी रही। मां के जयकारों और भक्तिमय माहौल के बीच लोगों ने मां दुर्गा को अंतिम विदाई दी।

सिंदूर खेला में झलकी बंगाली परंपरा

मां दुर्गा की विदाई से पहले बंगाली समाज की महिलाओं ने पारंपरिक सिंदूर खेला की रस्म निभाई। महिलाओं ने मां दुर्गा को सिंदूर अर्पित किया और एक-दूसरे को सिंदूर लगाकर सुख, समृद्धि और खुशहाली की मंगलकामना की। इसके बाद विधि-विधान के साथ मां की आरती उतारी गई और परिवार की सुख-शांति के साथ समाज में सद्भाव की प्रार्थना की गई।

सिंदूर से सजे चेहरे, मां के प्रति अटूट श्रद्धा और विदाई के समय नम आंखों का दृश्य हर किसी को भावुक कर रहा था। यह परंपरा बंगाली समाज की सांस्कृतिक विरासत और मां दुर्गा के प्रति गहरी आस्था का प्रतीक बनी।

अगले बरस फिर आने की कामना

दुर्गा पूजा का उत्सव मां दुर्गा की प्रतिमाओं के विसर्जन के साथ संपन्न हो गया, लेकिन श्रद्धालुओं के मन में मां के प्रति विश्वास और भक्ति बरकरार है। विदाई के इस भावुक क्षण में हर भक्त की जुबां पर यही प्रार्थना रही कि मां दुर्गा अगले वर्ष फिर आएं और सभी के जीवन में सुख, शांति, खुशहाली और समृद्धि का आशीर्वाद दें।

Post by – Aamir khan

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