कटिहार के नाम में छिपी है माता गौरी से जुड़ी पौराणिक मान्यता, सावन में बढ़ जाता है धार्मिक महत्व
कटिहार। कटिहार की पहचान सिर्फ एक शहर के रूप में नहीं, बल्कि पौराणिक मान्यताओं और धार्मिक आस्था से भी जुड़ी हुई है। महिला विकास मंच की जिला अध्यक्षा रश्मि कुणाल ने सावन मिलन समारोह के दौरान कटिहार के नामकरण से जुड़ी एक महत्वपूर्ण पौराणिक मान्यता का उल्लेख किया।
मान्यता के अनुसार, कटिहार का नाम माता गौरी के ‘कटि के हार’ से जुड़ा हुआ माना जाता है। यही वजह है कि कटिहार की भूमि को धार्मिक दृष्टिकोण से विशेष महत्व प्राप्त है।
सावन का महीना भगवान भोलेनाथ को समर्पित माना जाता है। इस पवित्र महीने में शिव आराधना के साथ माता गौरी की पूजा का भी विशेष महत्व है। कटिहार में भी सावन के दौरान श्रद्धालुओं के बीच भगवान शिव और माता गौरी की पूजा-अर्चना को लेकर विशेष आस्था देखने को मिलती है।
रश्मि कुणाल ने कहा कि कटिहार धार्मिक और पौराणिक दृष्टिकोण से बेहद महत्वपूर्ण भूमि है। सावन मास में यहां भगवान भोलेनाथ और माता गौरी की आराधना का अपना अलग महत्व है। उन्होंने कहा कि इसी धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत को आगे बढ़ाने के उद्देश्य से महिला विकास मंच की ओर से सावन मिलन समारोह का आयोजन किया गया।
उन्होंने कहा कि आधुनिकता के दौर में कई पारंपरिक उत्सव और लोक संस्कृति धीरे-धीरे पीछे छूट रहे हैं। ऐसे आयोजनों के माध्यम से महिलाओं को एक मंच पर लाकर सावन की परंपरा, लोकगीत, पूजा-पाठ और सांस्कृतिक विरासत को जीवंत रखने का प्रयास किया जा रहा है।
कटिहार के नाम से जुड़ी यह पौराणिक मान्यता और सावन की शिव-गौरी आराधना, शहर की धार्मिक पहचान को और भी खास बनाती है।











