बाढ़ में ‘नाद’ बनी नाव, इसी के सहारे स्कूल जा रहे बच्चे; एक हफ्ते से ग्रामीण परेशान
कटिहार के समेली प्रखंड के दिरा चांदपुर गांव में बाढ़ ने ग्रामीणों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। गंगा और कोसी नदी के बढ़ते जलस्तर के कारण गांव के कई इलाकों में पानी फैल गया है।
सबसे ज्यादा परेशानी स्कूली बच्चों को हो रही है। पिछले करीब एक सप्ताह से आवागमन का समुचित साधन नहीं होने के कारण बच्चे जुगाड़ के सहारे स्कूल जाने को मजबूर हैं।
दिरा चांदपुर गांव के रहने वाले वर्ग 5 के आदित्य कुमार और वर्ग 6 के मयंक कुमार, जो सगे भाई हैं और मध्य विद्यालय मोरसंडा के छात्र हैं, बाढ़ के पानी को पार करने के लिए घर में रखे नाद को नाव की तरह इस्तेमाल कर स्कूल पहुंच रहे हैं।
बच्चों की यह तस्वीर बताती है कि बाढ़ के बीच पढ़ाई जारी रखने के लिए उन्हें कितनी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है।
ग्रामीणों का कहना है कि नदी का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है और स्थिति गंभीर होती जा रही है। बच्चों को स्कूल भेजना अभिभावकों के लिए भी चिंता का विषय बना हुआ है। वहीं महिलाओं और छात्राओं को भी जलजमाव के कारण परेशानी उठानी पड़ रही है।
स्थानीय ग्रामीण सचित कुमार यादव ने जिला प्रशासन से बाढ़ प्रभावित इलाके में नाव की व्यवस्था, सुरक्षित आवागमन और राहत सामग्री उपलब्ध कराने की मांग की है।
सवाल यह है कि जब बाढ़ के पानी में बच्चे नाद को नाव बनाकर स्कूल जाने को मजबूर हैं, तो आखिर प्रशासन की नाव इन गांवों तक कब पहुंचेगी?











