100वीं जयंती पर याद किए गए महान संगीतकार डॉ. भूपेन हजारिका, उनकी आवाज में बसती थी असम की आत्मा
100वीं जयंती पर याद किए गए महान संगीतकार डॉ. भूपेन हजारिका, उनकी आवाज में बसती थी असम की आत्मा
महान संगीतकार, गायक और गीतकार डॉ. भूपेन हजारिका जी की 100वीं जयंती पर उन्हें श्रद्धापूर्वक याद किया गया। भूपेन दा ने अपनी आवाज और संगीत के जरिए न सिर्फ असम, बल्कि पूरे पूर्वोत्तर भारत की संस्कृति, संवेदना और आत्मा को देशभर तक पहुंचाया।
उनका संगीत समाज के अलग-अलग वर्गों की भावनाओं और विचारों को आवाज देने का माध्यम बना। उनके गीतों ने लोगों को जोड़ने और आपसी भाईचारे की भावना को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
इस विशेष अवसर पर उनके जीवन और योगदान को याद करते हुए कहा गया कि भूपेन हजारिका का संगीत केवल मनोरंजन तक सीमित नहीं था, बल्कि उसमें समाज और आम लोगों की भावनाओं की गहरी अभिव्यक्ति दिखाई देती थी।
गुवाहाटी में पिछले वर्ष आयोजित उनके जन्म शताब्दी समारोह के शुभारंभ कार्यक्रम में शामिल होने की स्मृतियों को भी साझा किया गया।
डॉ. भूपेन हजारिका की कला, संगीत और सामाजिक सरोकारों से जुड़ी विरासत आज भी लोगों को प्रेरित करती है। उनकी आवाज और उनके विचार आने वाली पीढ़ियों तक भारत की सांस्कृतिक विरासत को समृद्ध करते रहेंगे।











