अररिया जोकीहाट पेपरलेस रजिस्ट्री के विरोध में निबंधन कार्यालय में धरना, पुराने तरीके से स्टाम्प पर रजिस्ट्री की मांग।

अररिया जोकीहाट पेपरलेस रजिस्ट्री के विरोध में निबंधन कार्यालय में धरना, पुराने तरीके से स्टाम्प पर रजिस्ट्री की मांग।

जोकीहाट निबंधन कार्यालय में पेपरलेस रजिस्ट्री व्यवस्था के विरोध में मंगलवार को कातिब, मुंशी एवं ग्रामीणों ने धरना-प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने सरकार से पुराने पद्धति के आधार पर स्टाम्प पेपर के माध्यम से रजिस्ट्री की व्यवस्था बहाल करने की मांग की। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि नई व्यवस्था में कई व्यवहारिक समस्याएं सामने आ रही हैं, जिससे ग्रामीण क्षेत्र के लोगों को परेशानी हो रही है।

धरना में शामिल लोगों ने कहा कि निबंधन प्रक्रिया में कागजी दस्तावेज नहीं मिलने से भविष्य में जमीन की खरीद-बिक्री से जुड़े प्रमाण सुरक्षित रखने को लेकर चिंता बनी हुई है। उनका आरोप है कि नई व्यवस्था में न तो बिक्री करने वाले और न ही खरीददार के हस्ताक्षर ना ही
पूर्व की तरह स्पष्ट रूप से दस्तावेज पर उपलब्ध होते हैं।
यहाँ तक कि हाकिम का हस्ताक्षर भी नही होता है
इससे ग्रामीणों में व्यवस्था को लेकर असमंजस की स्थिति है।
प्रदर्शनकारियों ने यह भी कहा कि रजिस्ट्री से संबंधित कई फॉर्मेट अंग्रेजी में हैं। ग्रामीण इलाके में बड़ी संख्या में ऐसे लोग हैं, जो अंग्रेजी पढ़ने-लिखने में सक्षम नहीं हैं। ऐसे में उन्हें दस्तावेज की पूरी जानकारी समझने में परेशानी हो सकती है। इसके अलावा ओटीपी आधारित प्रक्रिया को लेकर भी लोगों ने चिंता जताई। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि मोबाइल और ओटीपी के इस्तेमाल के दौरान यदि किसी व्यक्ति से गलत तरीके से जानकारी हासिल की जाती है तो साइबर अपराध की आशंका बढ़ सकती है।

कातिबों का कहना था कि वर्तमान व्यवस्था में वे निबंधन कार्यालय में बैठे हैं, लेकिन आम लोगों की संख्या अपेक्षाकृत कम हो गई है। ग्रामीणों ने कहा कि जमीन जैसी महत्वपूर्ण संपत्ति से जुड़े दस्तावेजों में पारदर्शिता और भविष्य में प्रमाण उपलब्ध रहना जरूरी है। इसलिए सरकार को ग्रामीण क्षेत्रों की वास्तविक परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए व्यवस्था की समीक्षा करनी चाहिए।

धरना-प्रदर्शन में मुंशी सह अध्यक्ष हबीबुर रहमान, सचिव सुधीर कुमार दास, मो. जावेद आलम, अब्दुल वहाब मकसूद, अब्दुल वहाब, नसीम उद्दीन, हलीम उद्दीन, बासुदेव मंडल, बिनय नंदन ठाकुर सहित अन्य लोग मौजूद थे। वहीं ग्रामीणों की ओर से मो. यासीन, कुर्बान अली, तबरेज आलम, एहतशाम, दानिश, मो. फरमान, मो. मंजर, आशिक इलाही, शैलेन्द्र कुमार सहित अन्य लोगों ने भी विरोध जताया।

प्रदर्शनकारियों ने सरकार से मांग की कि पेपरलेस रजिस्ट्री व्यवस्था की कमियों की समीक्षा कर ग्रामीणों के लिए सरल और सुरक्षित प्रक्रिया लागू की जाए। उन्होंने पुराने पद्धति के आधार पर स्टाम्प पेपर पर रजिस्ट्री कराने की व्यवस्था फिर से शुरू करने की गुहार लगाई। उनका कहना था कि इससे दस्तावेज का भौतिक प्रमाण भी लोगों के पास रहेगा और ग्रामीण क्षेत्र के लोगों को रजिस्ट्री प्रक्रिया समझने एवं सुरक्षित रखने में सहूलियत होगी।

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