मनरेगा से बने कचरा भवन में भारी अनियमितता का आरोप, दीवारें फटीं और टीन शेड ध्वस्त
आजमनगर प्रखंड क्षेत्र से मनरेगा योजना में कथित अनियमितता का मामला सामने आया है। खुरियल पंचायत के वार्ड नंबर 4 में मनरेगा के तहत करीब 7 लाख 50 हजार रुपये की लागत से बनाए गए कचरा भवन की गुणवत्ता पर ग्रामीणों ने गंभीर सवाल खड़े किए हैं।ग्रामीणों का आरोप है कि निर्माण कार्य में कथित तौर पर मानकों की अनदेखी की गई, जिसके कारण भवन की दीवारों में दरारें पड़ने लगी हैं और भवन के ऊपर लगाया गया टीन शेड भी ध्वस्त हो गया है। ग्रामीणों ने योजना की राशि के बंदरबांट का भी आरोप लगाया है और पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच की मांग की है।तस्वीरों में साफ तौर पर देखा जा सकता है कि मनरेगा के तहत बनाए गए कचरा भवन की स्थिति निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर सवाल खड़े कर रही है। भवन की दीवारों में दरारें दिखाई दे रही हैं, जबकि ऊपर लगाया गया टीन शेड भी क्षतिग्रस्त होकर गिर चुका है।ग्रामीणों का कहना है कि लाखों रुपये खर्च होने के बावजूद यदि भवन इस तरह जर्जर होने लगे, तो निर्माण कार्य में इस्तेमाल की गई सामग्री और कार्य की गुणवत्ता की जांच होना बेहद जरूरी है।इस मामले को लेकर जब खुरियल पंचायत के मुखिया जाकिर हुसैन से जानकारी ली गई तो उन्होंने निर्माण में आई खामी के लिए लेबर और मिस्त्री पर जिम्मेदारी डालते हुए अपना पक्ष रखा।वहीं, ग्रामीण मुखिया के इस जवाब से संतुष्ट नजर नहीं आए। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि योजना के क्रियान्वयन में मुखिया, जेई, पीटीए और पीआरएस की कथित मिलीभगत से सरकारी राशि का बंदरबांट किया गया है।हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि होना अभी बाकी है।ग्रामीणों का कहना है कि मनरेगा जैसी सरकारी योजना का उद्देश्य गांवों में विकास कार्य कराना और सरकारी राशि का सही तरीके से उपयोग करना है। ऐसे में लाखों रुपये की लागत से बने भवन की हालत इतनी खराब होना जांच का विषय है।ग्रामीणों ने संबंधित विभाग के वरीय अधिकारियों से मांग की है कि मौके पर पहुंचकर भवन निर्माण की गुणवत्ता, योजना की स्वीकृत राशि, मापी-पुस्तिका, भुगतान और कार्य से जुड़े अभिलेखों की जांच कराई जाए।अब देखना होगा कि ग्रामीणों द्वारा लगाए गए आरोपों के बाद विभागीय अधिकारी इस मामले में क्या कार्रवाई करते हैं और जांच में निर्माण कार्य की वास्तविक स्थिति क्या सामने आती है। यदि जांच में अनियमितता की पुष्टि होती है तो जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई की मांग भी ग्रामीणों ने की है।











