सिलीगुड़ी–जलपाईगुड़ी के बीच मेट्रो रेल की प्रारंभिक सर्वेक्षण प्रक्रिया शुरू*

*स्टेशनों, संभावित मार्ग, रखरखाव केंद्र और तकनीकी ढांचे की व्यवहार्यता का होगा अध्ययन; जनप्रतिनिधियों एवं नागरिक संगठनों से भी लिए जा रहे सुझाव*

सिलीगुड़ी/जलपाईगुड़ी, 26 अगस्त 2026। उत्तर बंगाल के दो प्रमुख शहरों—सिलीगुड़ी और जलपाईगुड़ी—को मेट्रो रेल सेवा से जोड़ने की दिशा में प्रारंभिक सर्वेक्षण शुरू हो गया है। इस सर्वेक्षण के माध्यम से प्रस्तावित परियोजना की तकनीकी, आर्थिक और व्यावहारिक संभावनाओं का आकलन किया जाएगा। यह उत्तर बंगाल की शहरी परिवहन व्यवस्था में बड़े बदलाव की दिशा में पहला महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
प्रारंभिक सर्वेक्षण में यह पता लगाया जाएगा कि मेट्रो रेल का संभावित मार्ग कहां से शुरू होकर कहां तक बनाया जा सकता है। इसके साथ ही संभावित स्टेशनों, मेट्रो कोच के रखरखाव केंद्र, विद्युत आपूर्ति व्यवस्था, सिग्नल नियंत्रण प्रणाली, परिचालन नियंत्रण कक्ष और अन्य आवश्यक बुनियादी ढांचे के लिए उपयुक्त स्थानों की पहचान की जाएगी।
बताया जा रहा है कि मेट्रो परियोजना की वास्तविक उपयोगिता और यात्री क्षमता का भी समानांतर अध्ययन किया जाएगा। इसमें दोनों शहरों के बीच प्रतिदिन यात्रा करने वाले लोगों की संख्या, प्रमुख आवासीय और व्यावसायिक क्षेत्र, सरकारी कार्यालय, शिक्षण एवं चिकित्सा संस्थान, रेलवे स्टेशन, बस टर्मिनल तथा पर्यटन केंद्रों को ध्यान में रखा जा सकता है। प्रारंभिक रिपोर्ट के बाद विस्तृत तकनीकी सर्वेक्षण और विस्तृत परियोजना प्रतिवेदन तैयार करने की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।
*संभावित स्टेशनों को लेकर सुझाव*
सर्वेक्षण के वर्तमान चरण में संभावित स्टेशनों का चयन सबसे महत्वपूर्ण विषय माना जा रहा है। इसके लिए स्थानीय जनप्रतिनिधियों, नागरिक संगठनों और रेलवे से जुड़ी विभिन्न समितियों के सदस्यों से राय ली जा रही है। सूत्रों के अनुसार, कई क्षेत्रों में मेट्रो स्टेशन स्थापित करने के सुझाव मिलने शुरू हो गए हैं।
जलपाईगुड़ी क्षेत्र में सर्किट बेंच, मोहितनगर, सरकारपाड़ा और बेलाकोबा जैसे स्थानों पर स्टेशन बनाने के प्रस्ताव सामने आए हैं। हालांकि अभी किसी स्टेशन अथवा मार्ग को अंतिम स्वीकृति नहीं मिली है। सर्वेक्षण रिपोर्ट और यात्री मांग के अध्ययन के बाद ही प्रस्तावित मार्ग तथा स्टेशनों की अंतिम रूपरेखा निर्धारित होगी।
प्रारंभिक योजना के अनुसार पहले चरण में जलपाईगुड़ी के बाहरी क्षेत्र से सिलीगुड़ी तक मेट्रो संपर्क स्थापित करने की संभावना पर विचार किया जा सकता है। भविष्य में इस लाइन को एक ओर बागडोगरा और दूसरी ओर जलपाईगुड़ी शहर के अंदर तक विस्तारित किए जाने की संभावना भी जताई जा रही है। यह फिलहाल केवल प्रारंभिक विचार है और इसका अंतिम स्वरूप सर्वेक्षण के निष्कर्षों पर निर्भर करेगा।
*राइट्स को व्यवहार्यता अध्ययन का दायित्व*
इससे पहले राज्य सरकार ने रेल इंडिया टेक्निकल एंड इकोनॉमिक सर्विस यानी राइट्स लिमिटेड को जलपाईगुड़ी–सिलीगुड़ी मेट्रो कॉरिडोर का तकनीकी एवं आर्थिक व्यवहार्यता अध्ययन तैयार करने का दायित्व सौंपा था। अध्ययन में प्रस्तावित परियोजना की तकनीकी संरचना, निर्माण लागत, संभावित यात्री संख्या, भूमि की आवश्यकता, पर्यावरणीय प्रभाव और वित्तीय उपयोगिता का आकलन किया जाना है।
व्यवहार्यता रिपोर्ट अनुकूल मिलने के बाद विस्तृत परियोजना प्रतिवेदन तैयार होगा। इसके बाद केंद्र और राज्य सरकार की स्वीकृति, वित्तीय भागीदारी, भूमि उपलब्धता तथा विभिन्न वैधानिक अनुमतियों की प्रक्रिया पूरी करनी होगी। इसलिए प्रारंभिक सर्वेक्षण शुरू होने का अर्थ यह नहीं है कि निर्माण कार्य तत्काल प्रारंभ हो जाएगा।
*उत्तर बंगाल को क्या होगा लाभ?*
सिलीगुड़ी उत्तर-पूर्वी भारत का प्रवेश द्वार होने के साथ व्यापार, पर्यटन, चिकित्सा और शिक्षा का प्रमुख केंद्र है। दूसरी ओर जलपाईगुड़ी एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक एवं न्यायिक शहर है। दोनों शहरों के बीच प्रतिदिन बड़ी संख्या में लोग यात्रा करते हैं। सड़क यातायात पर बढ़ता दबाव, जाम और सार्वजनिक परिवहन की सीमित क्षमता को देखते हुए मेट्रो रेल एक दीर्घकालीन समाधान सिद्ध हो सकती है।
परियोजना लागू होने पर दोनों शहरों के बीच यात्रा का समय घट सकता है। राष्ट्रीय राजमार्गों और शहर की प्रमुख सड़कों पर वाहनों का दबाव कम होने की संभावना है। इसके अतिरिक्त बागडोगरा हवाई अड्डे, न्यू जलपाईगुड़ी रेलवे स्टेशन, विभिन्न पर्यटन क्षेत्रों, सरकारी कार्यालयों तथा प्रमुख शिक्षण और चिकित्सा संस्थानों तक आवागमन अधिक सुविधाजनक हो सकता है।
मेट्रो संपर्क से सिलीगुड़ी–जलपाईगुड़ी क्षेत्र को एक संगठित ‘ट्विन सिटी’ के रूप में विकसित करने की योजना को भी गति मिल सकती है। इसके फलस्वरूप व्यापार, पर्यटन, रोजगार, रियल एस्टेट और स्थानीय निवेश की संभावनाएं बढ़ेंगी।
*चुनौतियां भी कम नहीं*
इस महत्वाकांक्षी परियोजना के सामने भूमि अधिग्रहण, घनी आबादी वाले क्षेत्रों में मार्ग निर्धारण, पर्यावरणीय स्वीकृति और निर्माण लागत जैसी कई चुनौतियां रहेंगी। सर्वेक्षण में यह भी तय करना होगा कि मेट्रो का कितना हिस्सा भूमिगत, एलिवेटेड अथवा सतह पर बनाया जाना आर्थिक तथा तकनीकी रूप से उपयुक्त होगा।
इसके साथ ही महानंदा और तीस्ता नदी क्षेत्र, वन एवं पर्यावरण संबंधी प्रतिबंध, मौजूदा रेलवे और सड़क नेटवर्क तथा बाढ़ एवं जलभराव की परिस्थितियों को भी ध्यान में रखना होगा। परियोजना तभी व्यावहारिक मानी जाएगी, जब संभावित यात्री संख्या उसके निर्माण और परिचालन खर्च को न्यायोचित ठहरा सके।
*लंबी प्रक्रिया का पहला कदम*
मेट्रो रेल परियोजना की घोषणा और निर्माण के बीच कई प्रशासनिक एवं तकनीकी चरण होते हैं। फिलहाल शुरू हुआ सर्वेक्षण इसी लंबी प्रक्रिया का प्रारंभिक चरण है। व्यवहार्यता रिपोर्ट सकारात्मक रहने और आवश्यक सरकारी स्वीकृतियां मिलने के बाद ही निर्माण की दिशा में ठोस प्रगति संभव होगी।
इसके बावजूद सिलीगुड़ी और जलपाईगुड़ी के लोगों के लिए यह महत्वपूर्ण घटनाक्रम है। यदि योजना समयबद्ध और पारदर्शी तरीके से आगे बढ़ती है, तो प्रस्तावित मेट्रो रेल उत्तर बंगाल की परिवहन व्यवस्था को आधुनिक बनाने के साथ पूरे क्षेत्र के आर्थिक एवं शहरी विकास की दिशा बदल सकती है।

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