शराब कंपनियों पर कार्रवाई को लेकर मंत्री मदन सहनी नाराज, अफसरों की कार्यशैली की CM सम्राट चौधरी से की शिकायत
पटना। बिहार में शराबबंदी कानून के बावजूद लगातार शराब की खेप पकड़े जाने और शराब कंपनियों के खिलाफ कार्रवाई नहीं होने का मामला अब सरकार के अंदर ही तूल पकड़ने लगा है। मद्य निषेध, उत्पाद एवं निबंधन मंत्री मदन सहनी अपने ही विभाग के अधिकारियों की कार्यशैली से नाराज हैं। मंत्री का आरोप है कि शराब जब्त होने के मामलों में संबंधित कंपनियों के खिलाफ कार्रवाई करने से विभागीय अधिकारी हिचक रहे हैं। इसको लेकर उन्होंने मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी को पत्र लिखकर शिकायत की है।
दरअसल, मंत्री मदन सहनी के निर्देश पर विभाग ने दस शराब कंपनियों को नोटिस जारी कर बिहार में उनकी शराब बड़ी मात्रा में पकड़े जाने पर स्पष्टीकरण मांगा था। नोटिस में कंपनियों की भूमिका सामने आने पर प्राथमिकी दर्ज करने की चेतावनी भी दी गई थी। मंत्री के मुताबिक, यह फैसला विभागीय अधिकारियों के साथ विचार-विमर्श के बाद लिया गया था। लेकिन अक्टूबर में हुई समीक्षा बैठक के दौरान विभागीय सचिव संजय कुमार सिंह समेत वरिष्ठ अधिकारियों ने इस कार्रवाई पर आपत्ति जताई। अधिकारियों का तर्क था कि शराब कंपनियों के एसोसिएशन ने कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं और नियमानुसार ऐसी कार्रवाई अदालत में टिक नहीं पाएगी।
मंत्री और विभागीय अधिकारियों के बीच इस मुद्दे पर मतभेद बढ़ने के बाद मामला मुख्यमंत्री तक पहुंच गया है। वहीं, दूसरी ओर राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग ने बिहार के मुख्य सचिव से अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति कल्याण विभाग के कल्याण पदाधिकारियों के आंदोलन पर 20 दिनों के भीतर जवाब मांगा है। आयोग ने एक अक्टूबर 2026 से जारी आंदोलन और कर्मचारियों की मांगों पर संज्ञान लेते हुए संबंधित अधिकारियों पर लगे आरोपों तथा अब तक की गई कार्रवाई का ब्योरा तलब किया है।











